नीलम घाटी का जंगल बहुत ही सुंदर था। वहाँ विक्रम नाम का एक शक्तिशाली और न्यायप्रिय शेर राज करता था। उसके शासन में सभी जानवर मिल-जुलकर और बिना किसी डर के रहते थे।
उसी जंगल में चिन्नू नाम का एक विशाल हाथी रहता था। चिन्नू का दिल बहुत बड़ा था और उसे जंगल के छोटे बच्चों के साथ खेलना बहुत पसंद था। लेकिन चिन्नू बहुत भारी-भरकम था, इसलिए दूसरे जानवर अक्सर उसका मज़ाक उड़ाते थे। 'तुम तो इतने बड़े हो कि तुम ठीक से चल भी नहीं सकते!' कहकर वे उसे चिढ़ाते थे। इससे चिन्नू बहुत दुखी रहता था।
एक दिन राजा विक्रम का जन्मदिन आने वाला था। पूरे जंगल में उत्सव की तैयारी होने लगी। बंदर मीठे फल लाए, लोमड़ियों ने फूलों से सजावट की और पक्षियों ने मधुर गीत गाने की तैयारी की। चिन्नू भी इस उत्सव में कुछ करना चाहता था। उसने उत्साह से कहा, 'मैं सबके लिए एक नृत्य करूँगा!' लेकिन यह सुनकर सब जानवर जोर-जोर से हँसने लगे। 'तुम नाचोगे? तुम्हारे नाचने से तो भूकंप आ जाएगा!' कहकर उन्होंने उसका अपमान किया। चिन्नू का दिल टूट गया और वह एक पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगा।
ऊँची चट्टान से यह सब देख रहे राजा विक्रम ने एक कोयल को चिन्नू के पास मदद के लिए भेजा। कोयल ने चिन्नू के पास जाकर प्यार से कहा, 'चिन्नू, तुम उदास क्यों हो? हमें तुम्हारी ज़रूरत है! हमारे गीतों के लिए एक लय की कमी है। तुम अपनी सूंड से पेड़ों के तनों को थपथपाकर बहुत सुंदर संगीत पैदा कर सकते हो। और सोचो, अगर तुम तालाब का ठंडा पानी फुहार की तरह नाचने वाले बच्चों पर छिड़कोगे, तो उन्हें कितना मज़ा आएगा!'
कोयल की बात सुनकर चिन्नू की आँखों में चमक आ गई। उसे समझ आया कि उसकी शक्ति उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि एक वरदान है। वह तुरंत उत्सव स्थल पर पहुँचा। चिन्नू ने अपनी सूंड से पेड़ों पर ताल दी और एक शानदार संगीत पैदा किया। साथ ही, उसने तालाब का शीतल जल फुहारों की तरह बच्चों पर छिड़का। पूरा जंगल खुशी से झूम उठा। जो जानवर उसका मज़ाक उड़ाते थे, वे अब उसकी प्रशंसा कर रहे थे।
राजा विक्रम ने मुस्कुराते हुए सबको एक सीख दी: एक सच्चा नेता वही है जो दूसरों की कमियाँ नहीं, बल्कि उनकी खूबियाँ ढूँढता है और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करता है।
Moral
दूसरों की कमियों का मज़ाक उड़ाने के बजाय, उनकी खूबियों को पहचानना और उनका सम्मान करना चाहिए।