एक घने और हरे-भरे जंगल में बहुत सारे जानवर खुशी-खुशी रहते थे। जंगल के बीचों-बीच एक विशाल पेड़ के नीचे, खरगोशों का एक परिवार रहता था। उसी परिवार में एक छोटा खरगोश पैदा हुआ जिसका नाम बनी था। बनी बाकी खरगोशों की तरह फुर्तीला नहीं था; वह जन्म से ही काफी मोटा और सुस्त था।
बनी के माता-पिता बहुत चिंतित थे। उन्हें डर था कि अगर बनी तेज़ नहीं दौड़ पाया, तो जंगल के शिकारी जानवरों से कैसे बचेगा? इसलिए, उन्होंने बनी को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा पेड़ की जड़ों के पास वाले घर में ही रहने को कहा। इस वजह से बनी को बाहर खेलने की आज़ादी नहीं थी और वह बहुत अकेला महसूस करता था।
उसी पेड़ की एक ऊँची टहनी पर एक प्यारी सी कबूतर रहती थी। कबूतर ने बनी के अकेलेपन को महसूस किया। एक दिन, जब कबूतर अपना घोंसला बनाने के लिए तिनके इकट्ठा कर रही थी, बनी ने चुपके से कुछ नरम पत्तियां और छोटी टहनियां लाकर उसके पास रख दीं। बनी की दयालुता देखकर कबूतर ने तय किया कि वह बनी की पक्की दोस्त बनेगी।
कबूतर समझ गई थी कि बनी को सिर्फ साथ की नहीं, बल्कि ताकत की भी ज़रूरत है। उसने एक तरकीब सोची। हर सुबह, बनी के जागने से पहले, कबूतर घर के दरवाज़े से लेकर पेड़ के चारों ओर हरी पत्तियों का एक सुंदर रास्ता बिछा देती थी। बनी जब बाहर आता, तो वह मिट्टी पर पैर रखे बिना उन पत्तियों पर कूदते-कूदते खेलता था। बनी के लिए यह एक खेल था, लेकिन असल में यह एक बेहतरीन कसरत थी।
हर दिन पत्तियों पर कूदने और छलांग लगाने से बनी का शरीर धीरे-धीरे मज़बूत होने लगा। उसका भारी शरीर अब छरहरा और फुर्तीला हो गया था। कुछ ही समय में, बनी जंगल के सबसे तेज़ दौड़ने वाले खरगोशों में से एक बन गया! अब वह बिना डरे जंगल में कहीं भी घूम सकता था। बनी के माता-पिता उसकी इस तरक्की को देखकर दंग रह गए। उन्होंने महसूस किया कि कबूतर की दोस्ती ने बनी को आत्मनिर्भर बना दिया है। अब बनी पूरे जंगल में आज़ादी से दौड़ता और खेलता है।
Moral
सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास से किसी भी कमजोरी को ताकत में बदला जा सकता है।