एक शांत गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। उसे प्रकृति की सुंदरता बहुत पसंद थी, खासकर रंग-बिरंगी तितलियों को उड़ते हुए देखना उसे बहुत अच्छा लगता था।
एक सुनहरी दोपहर, कविन ने एक बड़े पेड़ की छाया में एक कोकून देखा। वह कोकून धीरे-धीरे हिल रहा था। उसके अंदर एक इल्ली (caterpillar) एक सुंदर तितली बनने की प्रक्रिया में थी।
कविन बड़े ध्यान से देख रहा था। उसने देखा कि इल्ली बाहर निकलने के लिए बहुत संघर्ष कर रही है। कोकून का छेद बहुत छोटा था, जिससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल हो रहा था। इल्ली को इतनी मेहनत करते देख कविन को उस पर दया आ गई।
'बेचारी छोटी इल्ली, इसे कितनी मुश्किल हो रही है!' कविन ने सोचा। उसने सोचा कि क्यों न इसकी मदद की जाए। उसने अपने छोटे हाथों से कोकून के छेद को थोड़ा बड़ा कर दिया। अब रास्ता आसान हो गया था और इल्ली बिना किसी मेहनत के बाहर आ गई।
लेकिन तभी कुछ अजीब हुआ। बाहर आने वाली इल्ली एक सुंदर तितली नहीं बनी। उसके पंख बहुत कमजोर और सिकुड़े हुए थे। उसने उड़ने की कोशिश की, लेकिन उसके पंख इतने ढीले थे कि वह उड़ नहीं सकी और जमीन पर गिर पड़ी।
कविन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि उस संघर्ष और दबाव की जरूरत थी ताकि इल्ली के पंखों में ताकत आ सके। बिना मेहनत के मिली सफलता अक्सर अधूरी होती है। उसने सीखा कि बाधाओं से लड़ना ही हमें मजबूत बनाता है।
Moral
संघर्ष और मेहनत ही हमें असली मजबूती और सफलता दिलाते हैं।