सुनहरे खेतों से घिरे एक छोटे से गाँव में कधिर अपने पिता मारी के साथ रहता था। मारी एक मेहनती किसान थे, जिन्होंने कधिर के भविष्य के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। लेकिन कधिर हमेशा दुखी रहता था। वह अक्सर शिकायत करता, "चूंकि आप एक साधारण किसान हैं, इसलिए मैं बड़े शहरों के अच्छे स्कूलों में नहीं पढ़ सका।" कधिर ने कभी अपने पिता के उन हाथों को नहीं देखा जो उसके लिए दिन-रात मेहनत करते थे।
समय बीतता गया। कधिर शहर चला गया, एक बड़ी कंपनी में मैनेजर बन गया और एक आलीशान जीवन जीने लगा। वहीं गाँव में, मारी बूढ़े और कमजोर हो गए थे। बीमारी के कारण वे खेती नहीं कर पा रहे थे। एक दिन, मारी मदद मांगने के लिए शहर पहुँचे। उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा, "बेटा, मुझे इलाज के लिए थोड़े पैसों की ज़रूरत है।"
कधिर ने सहानुभूति दिखाने के बजाय गुस्से में कहा, "आप हमेशा मुसीबत ही लाते हैं! आपकी गरीबी की वजह से ही मुझे बचपन में इतनी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ीं!" कधिर ने उन्हें दुत्कार कर भगा दिया। मारी बहुत दुखी होकर वापस लौट गए।
कुछ महीनों बाद, कधिर एक व्यापारिक काम से तटीय शहर गया। वहाँ उसने अरुण नाम के एक छोटे लड़के को सामान बेचते देखा। कधिर ने पूछा, "नन्हे बालक, तुम इतनी कम उम्र में इतना काम क्यों कर रहे हो?"
अरुण ने शांति से उत्तर दिया, "मेरे पिताजी बीमार हैं। उन्होंने हमारे लिए काम करते समय अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा। अब उनकी दवाइयों और भोजन के लिए मुझे यह काम करना पड़ता है। उनकी सेवा करना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है।"
अरुण की बात सुनकर कधिर सन्न रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने महसूस किया कि जिस गरीबी को वह अपनी असफलता का कारण मान रहा था, वही उसके पिता का त्याग था। कधिर तुरंत अपने गाँव भागा। उसने अपने पिता के पैरों में गिरकर माफी माँगी। कधिर अपने पिता को शहर ले आया और उनकी बेहतरीन देखभाल करने लगा।
Moral
माता-पिता के बलिदानों का सम्मान करें; उनका प्रेम ही जीवन की असली पूँजी है।