एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत होनहार था, लेकिन उसकी एक समस्या थी—वह छोटी-छोटी बातों पर बहुत घबरा जाता था। एक शाम, अर्जुन को एहसास हुआ कि वह अपना स्कूल प्रोजेक्ट पूरा करना भूल गया है, जिसे अगले दिन जमा करना था। डर के मारे उसकी धड़कनें बढ़ गईं और वह सो नहीं सका। वह जितना शांत होने की कोशिश करता, उतनी ही उसकी चिंता बढ़ती जाती।
उसके दादाजी ने उसकी परेशानी देख ली। उन्होंने प्यार से कहा, 'अर्जुन, तुम अकेले इतना बोझ क्यों उठा रहे हो? इस संसार में एक ऐसी शक्ति है जिसका कोई मुकाबला नहीं है। अपनी सारी चिंताएं उस ईश्वर को सौंप दो।' दादाजी उसे पास के एक मंदिर ले गए। वहाँ शांति से बैठकर अर्जुन ने अपनी आँखें बंद कीं और उस परम शक्ति का ध्यान किया। उसे महसूस हुआ कि वह शक्ति उसकी समस्याओं से कहीं अधिक महान है। धीरे-धीरे उसका मन शांत हो गया और उसे अपना काम पूरा करने का रास्ता मिल गया।
उस रात अर्जुन चैन से सोया। उसने सीखा कि जब हम खुद को उस असीम शक्ति के हवाले कर देते हैं, तो मन का डर मिट जाता है।