एक सुंदर से गाँव में अर्जुन अपने दादाजी के साथ रहता था। वह गाँव कभी अपनी हरियाली के लिए जाना जाता था, लेकिन उस साल गर्मी बहुत बढ़ गई और बारिश बिल्कुल नहीं हुई। खेत सूख गए और पेड़-पौधे मुरझाने लगे। अर्जुन का प्यारा कुत्ता, शेरू, भी प्यास से बेहाल होकर लेटा रहता था।
अर्जुन ने उदास होकर पूछा, 'दादाजी, सब कुछ इतना सूखा क्यों हो गया है? चारों तरफ हरियाली कहाँ चली गई?'
दादाजी ने अर्जुन को पास बिठाया और आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा, 'बेटा, अगर आसमान से बारिश की एक बूंद भी न गिरे, तो इस धरती पर एक छोटा सा घास का तिनका भी नहीं उग पाएगा। बारिश ही इस दुनिया का आधार है।'
कुछ दिनों बाद, आसमान में काले बादल छा गए। जैसे ही बारिश की पहली बूंदें मिट्टी पर गिरीं, धरती की खुशबू चारों ओर फैल गई। देखते ही देखते, सूखी जमीन से नन्हे-नन्हे हरे अंकुर फूटने लगे। शेरू खुशी से उछलने लगा। अर्जुन समझ गया कि आसमान से गिरने वाली वह छोटी सी बूंद ही जीवन का असली जादू है।