एक छोटे से गाँव में कवि और मीरा नाम का एक जोड़ा रहता था। कवि खेतों में मेहनत करता था ताकि उनका घर चल सके। उनका जीवन बहुत सादा था। एक बार गाँव में बड़ा मेला लगा। हर कोई नए कपड़े और गहने खरीद रहा था। मीरा का भी मन हुआ कि वह एक सुंदर साड़ी खरीदे, लेकिन उसे पता था कि इस महीने कवि की कमाई कम हुई है।
मीरा ने अपनी इच्छा को दबा लिया। उसने घर के खर्चों को बहुत समझदारी से चलाया ताकि वे अपनी सामर्थ्य से बाहर न जाएँ। एक शाम, कवि बहुत थका हुआ घर लौटा। मीरा ने उसके लिए स्वादिष्ट भोजन बनाया और घर में शांति का माहौल रखा। कवि को मीरा के साथ रहकर बहुत सुकून मिला।
कुछ महीनों बाद, फसल अच्छी हुई और कवि के पास कुछ अतिरिक्त पैसे आए। कवि ने मीरा से कहा, "जब हमारे पास कम पैसे थे, तब तुमने जिस तरह से घर संभाला, उसी की वजह से आज हम खुश हैं।" मीरा मुस्कुराई और बोली, "अब हम अपनी बचत से कुछ अच्छा खरीद सकते हैं।" कवि समझ गया कि मीरा केवल उसकी पत्नी नहीं, बल्कि उसके जीवन का आधार है।