एक छोटे से गाँव में लियो नाम का एक लड़का अपने पिता थॉमस के साथ रहता था। थॉमस एक बहुत अच्छा बढ़ई था। एक दिन उसने लकड़ी की एक बहुत सुंदर मेज बनाई। तभी गाँव का एक अमीर व्यापारी वहाँ आया और बोला, 'यह मेज बहुत शानदार है! मैं इसे खरीद लूँगा। लेकिन एक शर्त है, मेज के किनारे पर जो एक छोटा सा दरार है, उसे तुम छिपा देना, इसके बदले मैं तुम्हें एक सोने का सिक्का दूँगा।'
थॉमस के मन में एक पल के लिए लालच आया। उस सोने के सिक्के से लियो के लिए नए कपड़े और खिलौने आ सकते थे। लेकिन लियो ने धीरे से कहा, 'पिताजी, वह सोना हमें खुशी तो दे सकता है, लेकिन वह झूठ पर टिका होगा।'
थॉमस ने अपने बेटे की आँखों में सच्चाई देखी। उसने व्यापारी से कहा, 'क्षमा करें साहब, मुझे ऐसा लाभ नहीं चाहिए जो ईमानदारी पर आधारित न हो। मैं इस दरार को ठीक कर दूँगा, या फिर आप इसे न खरीदें। पर मैं झूठ बोलकर धन नहीं कमाऊँगा।'
व्यापारी थॉमस की ईमानदारी से बहुत प्रभावित हुआ। उसने न केवल थॉमस को उसकी सच्चाई के लिए पुरस्कृत किया, बल्कि पूरे गाँव में उसकी प्रशंसा भी की।