एक शांत गाँव में सैम नाम का एक लड़का और उसके पिता रवि रहते थे, जो लकड़ी काटते थे। रवि बहुत ईमानदार व्यक्ति थे। एक दिन जंगल में काम करते समय रवि को एक सोने का सिक्का मिला। जब वे उसे घर लाए, तो सैम खुशी से उछल पड़ा, 'पिताजी, इससे हम बहुत सारे खिलौने खरीद सकते हैं!' लेकिन रवि शांत थे। उन्होंने कहा, 'सैम, यह हमारा नहीं है। कोई इसे ढूंढ रहा होगा।'
अगले दिन, गाँव में एक बुजुर्ग व्यक्ति रोते हुए आए, क्योंकि उनका सिक्कों वाला थैला खो गया था। रवि समझ गए कि वह सिक्का उन्हीं का था। एक पल के लिए रवि के मन में विचार आया, 'अगर मैं इसे रख लूँ, तो किसी को पता नहीं चलेगा।' लेकिन तुरंत ही उनका हृदय कांप उठा। उनके भीतर से एक आवाज़ आई, 'यदि तुम अन्याय करोगे, तो यह तुम्हारे विनाश का कारण बनेगा।' रवि ने वह सिक्का उस बुजुर्ग को लौटा दिया। बुजुर्ग ने उन्हें बहुत आशीर्वाद दिया। सैम ने अपने पिता को गर्व से देखा और सीखा कि ईमानदारी ही सच्ची शांति लाती है।