एक सुंदर से गाँव में आर्थर नाम का एक बहुत अमीर व्यक्ति रहता था। उसके पास बहुत सारी ज़मीन और एक बड़ा महल था। गाँव के सभी लोग उसे जानते थे, लेकिन उसकी अमीरी से ज़्यादा उसके सरल स्वभाव के लिए।
एक दिन, लियो नाम का एक छोटा लड़का बाज़ार में दौड़ रहा था। दौड़ते-दौड़ते वह अचानक आर्थर से टकरा गया। लियो बहुत डर गया और उसने सिर झुकाकर कहा, 'मुझे माफ़ कर दीजिए, साहब! मुझसे गलती हो गई।' गाँव वालों को लगा कि आर्थर ज़रूर गुस्सा करेगा, क्योंकि अमीर लोग अक्सर घमंडी होते हैं।
लेकिन आर्थर ने कुछ और ही किया। उसने प्यार से लियो के कंधे पर हाथ रखा और मुस्कुराते हुए कहा, 'कोई बात नहीं बेटा, तुम ठीक तो हो ना? बस वही ज़रूरी है।' लियो की आँखों में आँसू आ गए। उसे समझ आया कि आर्थर के पास धन तो बहुत है, लेकिन उसकी असली दौलत उसका विनम्र व्यवहार है। उस दिन पूरे गाँव ने जाना कि असली महानता धन में नहीं, बल्कि व्यवहार में होती है।