एक शांत गाँव में कदिर नाम का एक समझदार लड़का रहता था। उसे किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। एक दिन खेलते समय, उसके दोस्त मारन से गलती से कदिर का पसंदीदा खिलौना टूट गया। मारन डर गया और रोते हुए बोला, 'मुझे माफ़ कर दो कदिर, मैंने यह जानबूझकर नहीं किया।'
कदिर को एक पल के लिए बहुत गुस्सा आया। उसका मन किया कि वह मारन पर चिल्लाए। लेकिन तभी उसे अपने पिता की बात याद आई: 'जब गुस्सा आए, तो खुद पर काबू रखना सीखो।' कदिर ने एक गहरी साँस ली, अपनी आँखें बंद कीं और अपने गुस्से को शांत किया। उसने मुस्कुराकर कहा, 'कोई बात नहीं मारन, हम इसे ठीक कर लेंगे।'
कुछ दिनों बाद, गाँव के मुखिया जी को अपने पुस्तकालय की देखभाल के लिए एक सहायक की ज़रूरत थी। उन्होंने कदिर के इस शांत और समझदार व्यवहार को देखा था। कदिर की बुद्धिमानी और आत्म-नियंत्रण से प्रभावित होकर, उन्होंने कदिर को ही उस काम के लिए चुन लिया। अपने गुस्से पर काबू पाकर, कदिर के लिए सफलता का एक नया द्वार खुल गया।