एक छोटे से गाँव में अर्जुन और रोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। अर्जुन बहुत ही सरल और ईमानदार लड़का था; वह हमेशा बड़ों का आदर करता और कभी झूठ नहीं बोलता था। वहीं रोहन थोड़ा शरारती था, वह अपनी छोटी-छोटी बातों के लिए झूठ बोलने और दूसरों को धोखा देने में माहिर था।
एक बार गाँव के मेले में, एक बुजुर्ग व्यक्ति का बटुआ गिर गया। अर्जुन ने उसे तुरंत उठा लिया और दौड़कर उस बुजुर्ग को लौटा दिया। बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, 'बेटा, तुम्हारी यह ईमानदारी ही तुम्हारे जीवन में खुशियाँ लाएगी।' रोहन यह सब देखकर हँसा और बोला, 'इतनी ईमानदारी की क्या ज़रूरत है?'
कुछ समय बाद, अर्जुन के पिता के व्यापार में बहुत नुकसान हुआ। तभी उसी बुजुर्ग व्यक्ति ने, जो वास्तव में एक बड़े व्यापारी थे, अर्जुन के परिवार की मदद की। दूसरी ओर, रोहन ने अपनी चालाकी से गाँव वालों का भरोसा खो दिया था। जब रोहन को मदद की ज़रूरत पड़ी, तो कोई भी उसकी सहायता के लिए आगे नहीं आया। रोहन को समझ आ गया कि गलत व्यवहार केवल दुख ही लाता है।