एक शांत गाँव में सोमू और मीना नाम का एक सुखी जोड़ा रहता था। सोमू एक मेहनती किसान था और मीना एक बहुत ही सरल और संस्कारी महिला थी। दोनों के बीच बहुत प्रेम और सम्मान था। उसी गाँव में रवि नाम का एक व्यक्ति रहता था, जिसके मन में सोमू के प्रति ईर्ष्या थी। उसे दूसरों का सुखी परिवार देखकर बुरा लगता था और वह मीना के माध्यम से उनके घर को तोड़ने की साजिश रचने के बारे में सोचता था।
एक बार जब सोमू काम के सिलसिले में शहर गया हुआ था, तब रवि ने मीना से दोस्ती करने का नाटक किया। वह मीना को सोमू के खिलाफ भड़काने की कोशिश करने लगा और उसे गलत बातें बताने लगा। लेकिन मीना बहुत समझदार थी। उसने रवि की नीयत को तुरंत पहचान लिया। उसने रवि से बहुत ही गरिमा के साथ कहा, 'जो व्यक्ति दूसरों के सुखी वैवाहिक जीवन को नष्ट करने की कोशिश करता है, वह जीवित लाश के समान है।'
रवि को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उसे समझ आया कि उसकी बुरी सोच ने उसकी अपनी शांति और इज्जत छीन ली है। जब सोमू वापस आया, तो मीना ने उसे सब सच बता दिया। सोमू ने गुस्सा करने के बजाय रवि को सुधारने का मौका दिया। रवि ने कान पकड़कर माफी मांगी और कसम खाई कि वह कभी किसी के घर के बारे में बुरा नहीं सोचेगा।