एक शांत गाँव में अर्जुन और विक्रम नाम के दो मित्र रहते थे। अर्जुन बहुत ही शांत स्वभाव का था, जबकि विक्रम को बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था। एक दिन गाँव के उत्सव की तैयारी करते समय, विक्रम से गलती से अर्जुन का नया कुर्ता फट गया। माफी माँगने के बजाय, विक्रम गुस्से में चिल्लाया, "यह एक दुर्घटना थी, तुम मुझ पर चिल्लाओ मत!" और वहाँ से चला गया।
अर्जुन को बुरा लगा, लेकिन उसने पलटकर गुस्सा नहीं किया। उसने शांति से सोचा, "कोई बात नहीं, कपड़े ही तो हैं, दोस्ती ज़्यादा ज़रूरी है।" कुछ दिनों बाद, विक्रम के गुस्से की वजह से गाँव के लोग उससे नाराज हो गए और उसे अकेला छोड़ दिया। दूसरी ओर, अर्जुन की सहनशीलता और दयालुता देखकर गाँव के सभी लोग उसे बहुत सम्मान देने लगे। सालों बीत जाने के बाद भी, जब भी गाँव में किसी अच्छे इंसान की बात होती, तो अर्जुन का नाम बड़े गर्व से लिया जाता था। विक्रम का गुस्सा तो पल भर का था, लेकिन अर्जुन का धैर्य उसकी अमर पहचान बन गया।