एक शांत गाँव में कवि और रोहन नाम के दो मित्र रहते थे। कवि एक मेहनती किसान था, जबकि रोहन हमेशा दूसरों की तरक्की देखकर जलता था। एक बार कवि के बगीचे में इतनी अच्छी फसल हुई कि पूरे गाँव ने उसकी प्रशंसा की।
यह सुनकर रोहन को खुशी होने के बजाय जलन होने लगी। उसने सोचा, 'कवि को ही सब क्यों सराहते हैं?' ईर्ष्या के वश में होकर, रोहन ने एक रात चुपके से कवि के बगीचे में जाकर पौधों को नुकसान पहुँचाने वाला पदार्थ डाल दिया। अगली सुबह जब कवि ने अपने मुरझाए हुए पौधों को देखा, तो उसकी आँखों में आँसू आ गए। लेकिन रोहन की जीत ज्यादा देर नहीं टिकी। गाँव वालों ने रोहन की इस हरकत को देख लिया। दंड स्वरूप, रोहन को भारी जुर्माना भरना पड़ा और उसकी सारी जमा-पूँजी खत्म हो गई। दूसरों का बुरा करने की चाह में, रोहन ने अपना सब कुछ खो दिया।