एक शांत गाँव में कार्तिक और रोहन नाम के दो मित्र रहते थे। वे साथ पले-बढ़े थे, लेकिन उनके स्वभाव में ज़मीन-आसमान का अंतर था। कार्तिक दूसरों की सफलता देखकर खुश होता था, लेकिन रोहन को जब भी कार्तिक कुछ हासिल करता, उसे जलन महसूस होती। रोहन अक्सर मन ही मन सोचता, 'यह मुझसे बेहतर कैसे हो सकता है?'
एक बार गाँव में चित्रकला प्रतियोगिता हुई। कार्तिक ने बहुत ही सुंदर प्राकृतिक दृश्य बनाया। रोहन भी एक अच्छा कलाकार था, लेकिन कार्तिक की कला देखकर उसके मन में ईर्ष्या जाग उठी। अपनी कला सुधारने के बजाय, रोहन ने लोगों में यह अफवाह फैलाना शुरू कर दिया कि कार्तिक ने नकल की है। उसने कार्तिक को नीचा दिखाने की पूरी कोशिश की।
लेकिन सच्चाई की जीत हुई। कार्तिक को उसकी मेहनत और कला के लिए पुरस्कृत किया गया। समय बीतता गया, कार्तिक एक महान कलाकार बन गया और समाज में सम्मान पाने लगा। वहीं रोहन अपनी ईर्ष्या के कारण वहीं का वहीं रह गया। वह दूसरों को नीचे गिराने की कोशिश में खुद आगे बढ़ना ही भूल गया। उसे बहुत देर से समझ आया कि दूसरों की खुशी में खुश रहना ही असली महानता है।