एक छोटे से गाँव में आर्यन और समीर नाम के दो दोस्त रहते थे। आर्यन बहुत ही शांत और समझदार लड़का था, जबकि समीर थोड़ा चंचल था। एक दिन गाँव के मेले की तैयारी करते समय, समीर ने आर्यन का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, 'तुम बहुत धीरे काम करते हो आर्यन, तुम कुछ नहीं कर पाओगे!' आर्यन को बुरा लगा, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और बस मुस्कुरा दिया।
अगले दिन जब आर्यन वहाँ नहीं था, तो समीर ने दूसरे दोस्तों के साथ मिलकर धीरे से कहा, 'आर्यन असल में बहुत आलसी है, वह किसी काम का नहीं है।' यह बात आर्यन तक पहुँच गई। आर्यन को बहुत दुख हुआ। उसे लगा कि उसके दोस्तों की नज़रों में उसकी इज़्ज़त कम हो गई है। उनकी दोस्ती में दरार आ गई।
कुछ दिनों बाद, गाँव में एक समस्या आई और आर्यन ने अपनी समझदारी से सबकी मदद की। समीर को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे समझ आया कि जो बात वह आर्यन के सामने नहीं कह सका, उसे उसकी पीठ पीछे कहना कितना गलत था। समीर ने आर्यन से माफी माँगी और वादा किया कि वह कभी किसी की पीठ पीछे बुराई नहीं करेगा।