एक शांत गाँव में कार्तिक और रोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। कार्तिक बहुत ही ईमानदार और नेक दिल इंसान था, जबकि रोहन हमेशा कम मेहनत में ज़्यादा पैसा कमाने के लिए गलत रास्ते खोजता था। एक बार गाँव के मेले के लिए मिठाइयों का एक बहुत बड़ा ऑर्डर आया। कार्तिक का परिवार एक छोटी सी मिठाई की दुकान चलाता था।
रोहन ने एक चाल चलते हुए कहा, 'हमें असली घी इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं है। हम सस्ता और नकली घी इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी को पता भी नहीं चलेगा और हमारा मुनाफा दोगुना हो जाएगा!' रोहन अक्सर ऐसे ही छोटे-मोटे धोखे करके पैसे कमाता था। लेकिन जब मेले में उन मिठाइयों को खाया गया, तो कई गाँव वालों की तबीयत बिगड़ गई। धीरे-धीरे सबको रोहन की सच्चाई पता चल गई। लोगों ने उसका बहिष्कार कर दिया और उसका व्यापार पूरी तरह ठप हो गया। जहाँ कार्तिक की ईमानदारी ने उसे सम्मान दिलाया, वहीं रोहन को समझ आया कि धोखे की बुनियाद पर खड़ा किया गया साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है।