एक सुंदर से गाँव में कदिर नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत होनहार था, लेकिन उसे हमेशा इस बात का डर रहता था कि कहीं वह कोई गलती न कर दे। एक शाम, उसके पिता ने उसे एक छोटा सा दर्पण देते हुए कहा, 'कदिर, यह केवल तुम्हारा चेहरा नहीं दिखाता, यह तुम्हारे मन की सच्चाई भी दिखाता है।'
अगले दिन स्कूल में खेलते समय, कदिर से गलती से अपने दोस्त मुखिलन की पेंसिल टूट गई। डर के मारे कदिर ने किसी को कुछ नहीं बताया और चुप रहा। लेकिन उस दिन से कदिर के मन में एक अजीब सी बेचैनी रहने लगी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके सीने पर कोई भारी बोझ रखा हो। रात को जब उसने दर्पण में देखा, तो उसे अपना चेहरा खुश नहीं, बल्कि उदास और अपराधी जैसा लगा।
अगली सुबह, कदिर ने हिम्मत जुटाई और मुखिलन के पास जाकर बोला, 'मुखिलन, मुझे माफ़ कर दो, खेलते समय मुझसे तुम्हारी पेंसिल टूट गई।' मुखिलन गुस्सा नहीं हुआ, बल्कि उसने मुस्कुराकर कहा, 'कोई बात नहीं कदिर, मुझे खुशी है कि तुमने सच बताया।' कदिर को ऐसा लगा जैसे उसके दिल से कोई बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो। उसने समझ लिया कि झूठ बोलकर बचने से बेहतर है सच बोलकर चैन की नींद सोना।