एक घने जंगल के पास लियो नाम का एक लड़का अपने पिता साइलस के साथ रहता था। एक दिन जंगल में घूमते समय, लियो ने एक सुंदर सुनहरे पक्षी को देखा जो एक जाल में फँसा हुआ था। साइलस ने कहा, "लियो, अगर हम इस पक्षी को पकड़कर शहर में बेच दें, तो हमें बहुत पैसे मिलेंगे। इससे हम अपना घर ठीक कर सकेंगे और नए कपड़े खरीद सकेंगे।"
लियो ने उस पक्षी की आँखों में देखा। उन आँखों में डर और जीने की तड़प थी। लियो को महसूस हुआ कि लाभ के लिए उस पक्षी को कैद करना उसकी जान लेने जैसा होगा। उसे लगा कि गरीबी से लड़ना ठीक है, लेकिन किसी की जान लेना गलत है।
लियो ने धीरे से अपने पिता का हाथ पकड़ा और कहा, "पिताजी, भले ही हमें पैसे न मिलें, लेकिन हमें इस पक्षी की जान नहीं लेनी चाहिए। चाहे हमें कितनी भी कठिनाई क्यों न झेलनी पड़े, हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे किसी और का जीवन समाप्त हो जाए।"
साइलस को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत जाल खोल दिया। पक्षी खुशी से चहचहाते हुए नीले आसमान में उड़ गया। लियो ने उस दिन सीखा कि धन से कहीं अधिक मूल्यवान जीवन है।