एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके दादाजी के पास आमों का एक बड़ा बगीचा था। एक सुबह, दादाजी ने अर्जुन को कुछ छोटे पौधे दिए और कहा, 'अर्जुन, इन पौधों को आज शाम होने से पहले मिट्टी में लगा देना और पानी दे देना। अगर ये ज्यादा देर तक ऐसे ही रहे, तो सूख जाएंगे।'
अर्जुन ने काम शुरू किया, लेकिन तभी उसका दोस्त रोहन खेलने के लिए बुलाने आया। 'अर्जुन, चलो खेलते हैं! अभी तो बहुत समय है!' रोहन ने कहा। अर्जुन ने सोचा, 'बाद में कर लूँगा,' और वह खेलने चला गया। जब वह वापस लौटा, तो सूरज ढलने वाला था।
अर्जुन ने घबराहट में जल्दी-जल्दी पौधे लगाने की कोशिश की, लेकिन हड़बड़ी में उसने कुछ पौधे बहुत गहरा दबा दिए और पानी भी सही से नहीं डाल पाया। अगली सुबह उसने देखा कि सारे पौधे मुरझा गए थे। अर्जुन बहुत दुखी हुआ। दादाजी ने उसे समझाया, 'बेटा, जब भी नेक काम करने का अवसर मिले, उसे तुरंत कर लेना चाहिए। समय बीत जाने के बाद पछताने से कुछ नहीं होता।'