एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। एक शाम अर्जुन बहुत उदास बैठा था। उसके पालतू कुत्ते, शेरू, की मृत्यु हो गई थी और उसे लग रहा था कि सब कुछ खत्म हो गया है।
"दादाजी, अब कुछ भी नहीं बचा। ऐसा लग रहा है जैसे सब कुछ रुक गया है," अर्जुन रोते हुए बोला।
दादाजी ने उसके पास बैठकर पूछा, "अर्जुन, क्या तुम्हें अपना सपना याद है?"
"हाँ दादाजी, मैं सपने में बादलों के ऊपर उड़ रहा था," अर्जुन ने कहा।
"और जब तुम्हारी नींद खुली, तो क्या वह उड़ने वाला संसार वहीं था?" दादाजी ने पूछा।
"नहीं दादाजी, जागते ही वह सब गायब हो गया," अर्जुन ने उत्तर दिया।
दादाजी ने प्यार से समझाया, "जीवन भी ऐसा ही है। मृत्यु एक लंबी नींद की तरह है, और जन्म उस नींद से जागने जैसा है। जैसे एक सपना खत्म होता है ताकि दूसरा शुरू हो सके, वैसे ही जीवन का एक पड़ाव खत्म होता है ताकि नया सफर शुरू हो सके। इसलिए डरो मत, यह बस एक बदलाव है।"
दादाजी की बात सुनकर अर्जुन का डर कम हो गया। उसने समझ लिया कि जीवन अंत नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाला चक्र है।