एक शांत गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो बहुत चतुर था, लेकिन उसकी एक आदत थी—वह किसी भी चीज़ को बिना ठीक से समझे ही उसके बारे में राय बना लेता था। एक दिन उसके दादाजी ने उसे एक छोटा सा चमकता हुआ क्रिस्टल दिया और कहा, 'लियो, यह केवल एक पत्थर नहीं है, यह तुम्हें चीज़ों को उनके वास्तविक रूप में देखने में मदद करेगा।'
अगले दिन, लियो ने अपनी सहेली माया को रोते हुए देखा। माया ने कहा, 'मेरा छल्ला खो गया है!' लियो ने तुरंत सोचा, 'माया बहुत लापरवाह है।' लेकिन दादाजी की बात याद आते ही उसने उस क्रिस्टल से देखा। क्रिस्टल के माध्यम से देखने पर उसे दिखा कि छल्ला खोया नहीं था, बल्कि वह बस एक फूल के नीचे दब गया था। लियो ने उसे ढूँढ निकाला और माया को दे दिया। माया की खुशी देखकर लियो समझ गया कि बिना सोचे-समझे राय बनाना मन के अंधेरे जैसा है, और सत्य को स्पष्ट रूप से देखना ही असली सुख है।