एक सुंदर घाटी में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो को नई चीज़ों का बहुत शौक था—नए खिलौने, नए कपड़े और मिठाइयाँ। उसे लगता था कि जितनी ज़्यादा चीज़ें उसके पास होंगी, वह उतना ही खुश रहेगा।
एक दिन एक व्यापारी आया और उसने लियो को एक 'जादुई दर्पण' दिखाया। व्यापारी ने कहा, 'इस दर्पण में जो चाहोगे, वह तुम्हें मिल जाएगा।' लियो उस लालच में पड़ गया। उसने अपने सारे पैसे खर्च कर दिए और अपने माता-पिता से भी और चीज़ों की ज़िद करने लगा। लेकिन एक अजीब बात हुई—जैसे-जैसे उसकी इच्छाएँ बढ़ती गईं, उसकी शांति कम होती गई। उसे हर समय बस कुछ न कुछ पाने की बेचैनी रहने लगी। वह अपने दोस्तों के साथ खेलना भी भूल गया।
लियो के दादाजी, जो बहुत ज्ञानी थे, ने उसकी उदासी देखी। उन्होंने लियो को पास बिठाया और समझाया, 'बेटा, तुम परछाइयों के पीछे भाग रहे हो। तुम उन चीज़ों में सुख ढूँढ रहे हो जो आज हैं और कल नहीं रहेंगी। इस संसार को चलाने वाली जो परम शक्ति है, उसे पहचानो। यदि तुम उस परम सत्य से जुड़ जाओ और अपनी इन अंतहीन इच्छाओं को त्याग दो, तो तुम्हें वह शांति मिलेगी जो कभी खत्म नहीं होती।'
लियो को अपनी गलती समझ आ गई। उसने चीज़ों को इकट्ठा करना छोड़ दिया और प्रकृति की सुंदरता और ईश्वर की उपस्थिति में आनंद ढूँढना शुरू किया। जैसे ही उसके मन से लालच गया, उसे एक अद्भुत शांति का अनुभव हुआ। अब उसे किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होती थी।