बहुत समय पहले, हरी-भरी पहाड़ियों के बीच 'हरितवन' नाम का एक सुंदर राज्य था। वहाँ आर्यन नाम का एक दयालु राजा राज करता था। एक बार उस राज्य में भयंकर सूखा पड़ा। नदियाँ सूख गईं और फसलें बर्बाद हो गईं। लोग भूख से तड़पने लगे।
लोगों की दुर्दशा देखकर राजा आर्यन ने महल के सुख-सुविधाओं को त्याग दिया और खुद लोगों के बीच पहुँच गया। उन्होंने केवल आदेश नहीं दिए, बल्कि खुद कुएँ खोदने और तालाबों की सफाई करने के काम में जुट गए। एक बुजुर्ग किसान ने आश्चर्य से पूछा, 'महाराज, आप हमारे साथ इस धूल और पसीने में क्यों काम कर रहे हैं?' आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, 'जब मैं अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाऊँगा, तभी आप मुझे अपना सच्चा राजा मानेंगे।'
राजा को अपने साथ काम करते देख लोगों में नया उत्साह भर गया। सबने मिलकर काम किया और जल्द ही बारिश हुई, जिससे धरती फिर से हरी-भरी हो गई। लोग आर्यन को केवल एक राजा के रूप में नहीं, बल्कि अपने रक्षक के रूप में एक देवता की तरह पूजने लगे।