एक सुंदर गाँव में कवि और रोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। कवि को किताबें पढ़ने और नई चीजें सीखने का बहुत शौक था। वहीं रोहन को लगता था कि पढ़ाई करना समय की बर्बादी है। वह कहता, 'पढ़ाई छोड़ो, चलो खेलते हैं!'
एक दिन गाँव के बुजुर्ग ने एक पुराना नक्शा दिखाया। उन्होंने कहा, 'जो इस नक्शे के संकेतों को समझ लेगा, वही सही रास्ता खोज पाएगा।'
रोहन जोश में आकर बिना सोचे-समझे दौड़ पड़ा। लेकिन संकेतों को न समझ पाने के कारण वह रास्ता भटक गया और झाड़ियों में फंस गया। दूसरी ओर, कवि ने शांति से बैठकर नक्शे के संकेतों और दिशाओं को समझा। उसने सही रास्ता खोज लिया और रोहन की मदद भी की।
बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, 'रोहन, तुम्हारे पास आँखें तो हैं, लेकिन कवि के पास ज्ञान की दृष्टि है। सीखना ही हमें दुनिया को सही ढंग से देखने की शक्ति देता है।'