एक सुंदर से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता एक बहुत बड़े व्यापारी थे। उनके पास बहुत सारा सोना, ज़मीन और कीमती सामान था। आर्यन हमेशा अपनी दौलत पर गर्व करता था और कहता, 'हमारे पास सब कुछ है, हमें किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं!'
उसी गाँव में ईशान नाम का एक लड़का भी रहता था। ईशान का परिवार बहुत गरीब था। उसके पास खेलने के लिए महंगे खिलौने या सोना नहीं था, लेकिन उसके पास कुछ पुरानी किताबों का संग्रह था। ईशान अपना सारा समय पढ़ने और सीखने में बिताता था।
एक बार गाँव में भीषण बाढ़ आ गई। बाढ़ के पानी में आर्यन के पिता का सारा सोना, व्यापार और ज़मीन बह गई। आर्यन फूट-फूट कर रोने लगा, 'अब हमारे पास कुछ भी नहीं बचा!'
लेकिन ईशान नहीं रो रहा था। बाढ़ उसके शरीर या सामान को तो नुकसान पहुँचा सकती थी, लेकिन उसके दिमाग में जो ज्ञान था, उसे कोई नहीं छीन सकता था। जब गाँव फिर से बसने लगा, तो ईशान ने अपनी पढ़ी हुई बातों का उपयोग करके ग्रामीणों की मदद की। उसने उन्हें सिखाया कि खेती कैसे करें और पानी का प्रबंधन कैसे करें।
आर्यन ने तब महसूस किया कि सोना और धन तो बह गया, लेकिन ईशान का ज्ञान कभी नहीं मिट सकता। वही असली और कभी न खत्म होने वाली दौलत है।