एक सुंदर से गाँव में सोमू और रवि नाम के दो मित्र रहते थे। सोमू बहुत बुद्धिमान था, उसे किताबें पढ़ने और नई चीजें सीखने का बहुत शौक था। वहीं रवि का ध्यान केवल धन और सोने को इकट्ठा करने पर था। उसने बहुत मेहनत की और जल्द ही वह गाँव का सबसे अमीर आदमी बन गया।
लेकिन रवि को यह नहीं पता था कि धन का सही उपयोग कैसे किया जाता है या लोगों की पहचान कैसे की जाती है। एक बार उसने एक अनजान व्यक्ति की बातों में आकर अपना सारा धन गलत व्यापार में लगा दिया। देखते ही देखते रवि कंगाल हो गया। वह बहुत दुखी और परेशान रहने लगा।
दूसरी ओर, सोमू के पास बहुत पैसा तो नहीं था, लेकिन उसके पास ज्ञान का भंडार था। वह अपने ज्ञान से गाँव वालों की मदद करता था, जिससे लोग उसका बहुत सम्मान करते थे। एक दिन दुखी होकर रवि सोमू के पास आया और बोला, 'सोमू, मेरे पास बहुत धन था, लेकिन ज्ञान न होने के कारण मैंने सब खो दिया। अब मुझे धन की कमी से ज्यादा उस धन के खोने का दुख है।' सोमू ने उसे समझाया कि ज्ञान ही असली संपत्ति है और उसे फिर से सीखने की प्रेरणा दी।