एक सुंदर से गाँव में कदिर नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता एक बहुत बड़े व्यापारी थे। कदिर हमेशा अपने पिता के सोने के सिक्कों और कीमती सामानों को देखकर हैरान रह जाता था। वह अक्सर कहता, 'पिताजी, आप कितने अमीर हैं! मुझे भी आपके जैसा बहुत सारा धन चाहिए।'
एक दिन, उसके पिता उसे गाँव के एक बड़े पेड़ के नीचे ले गए। वहाँ एक बुजुर्ग व्यक्ति गाँव वालों को बहुत अच्छी कहानियाँ और जीवन की सीख दे रहे थे। जहाँ सब लोग ध्यान से सुन रहे थे, वहीं कदिर ज़मीन पर कंकड़ से खेल रहा था। उसने उस बुजुर्ग की बातों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया।
उसके पिता ने धीरे से पूछा, 'कदिर, क्या तुमने सुना कि दादाजी क्या कह रहे थे?' कदिर ने उत्तर दिया, 'नहीं पिताजी, मैं तो खेल रहा था। उन्होंने क्या कहा?'
पिता मुस्कुराए और बोले, 'मेरे बेटे, हमारे पास जो धन है, उसे कोई चुरा सकता है या वह खत्म हो सकता है। लेकिन जो ज्ञान तुम सुनकर प्राप्त करते हो, वह तुम्हारा अपना होगा। वह ज्ञान तुम्हें हमेशा सही रास्ता दिखाएगा। धन से भी बड़ा धन वह ज्ञान है जो हम सुनकर सीखते हैं।'
उस दिन के बाद से, कदिर ने हर बात को ध्यान से सुनना शुरू कर दिया। अच्छी बातें सुनकर वह एक बुद्धिमान लड़का बना। उसके इसी ज्ञान ने उसे जीवन में बहुत सफल बनाया।