एक सुंदर घाटी में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसकी एक कमी थी: उसे लगता था कि जो वह सोचता है, वही सही है। वह कभी यह नहीं देखता था कि दूसरे लोग कैसे रहते हैं या उन्हें क्या पसंद है।
एक गर्मी की छुट्टियों में, सैम नाम का एक नया लड़का वहाँ आया। सैम बहुत दयालु था, लेकिन उसके रहने और खेलने के तरीके लियो से अलग थे। जब भी सैम कुछ अलग करता, लियो उसका मज़ाक उड़ाता और कहता, 'यहाँ ऐसे नहीं किया जाता!' इससे सैम को बहुत बुरा लगता था।
गाँव के वार्षिक उत्सव के दौरान, लियो ने एक ऐसा खेल आयोजित करने की कोशिश की जो केवल उसके दोस्तों को पसंद था। लेकिन उसने देखा कि ज़्यादातर बच्चे सैम के साथ मिलकर एक नया खेल खेल रहे थे जो बहुत मज़ेदार था। लियो अकेला बैठा उदास महसूस कर रहा था।
तभी उसके दादाजी उसके पास आए और बोले, 'लियो, असली बुद्धिमानी केवल अपनी बात पर अड़े रहने में नहीं है। असली बुद्धिमानी दुनिया के साथ तालमेल बिठाकर जीने में है। दूसरों के जीने के तरीके को समझना और उनके साथ घुलना-मिलना ही सच्चा ज्ञान है।'
लियो को अपनी गलती समझ आ गई। वह सैम के पास गया और मुस्कुराते हुए बोला, 'क्या मैं भी तुम्हारे साथ यह खेल खेल सकता हूँ?' उस दिन के बाद से, लियो ने दूसरों के विचारों और उनके जीवन जीने के तरीकों का सम्मान करना सीख लिया।