बहुत समय पहले, एक सुंदर राज्य में आर्यन नाम का एक राजकुमार रहता था। आर्यन बहादुर था, लेकिन उसमें एक बड़ी कमी थी—अहंकार। उसे लगता था कि वह सबसे श्रेष्ठ है। जब भी कोई उसे कुछ समझाता, वह क्रोधित हो जाता था। एक बार, एक व्यापारी कीमती रत्न लेकर आया, तो आर्यन के मन में लालच आ गया और वह उन्हें हड़पना चाहता था। उसके मंत्रियों ने उसे समझाया, पर वह नहीं माना।
तब एक ज्ञानी महात्मा ने उसे समझाया, 'राजकुमार, सच्चा राजा वह नहीं जो अपनी शक्ति से डराए, बल्कि वह है जिसने अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और लोभ को जीत लिया हो। असली महानता इन्हीं गुणों के त्याग में है।'
आर्यन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने धीरे-धीरे अपने स्वभाव को बदला। उसने विनम्रता सीखी, क्रोध पर नियंत्रण पाया और लालच से दूर रहा। धीरे-धीरे प्रजा ने उसे डरना छोड़ दिया और उसे दिल से प्यार करने लगी। आर्यन समझ गया कि असली सम्मान पद से नहीं, बल्कि अच्छे चरित्र से मिलता है।