एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे बागवानी का बहुत शौक था। एक दिन उसके दोस्त रोहन ने एक योजना बनाई। 'अर्जुन, चलो इस ज़मीन को तैयार करते हैं और सुंदर फूल उगाकर उन्हें बेचते हैं। हम बहुत अमीर बन जाएंगे!' रोहन ने उत्साह से कहा।
अर्जुन भी बहुत खुश हुआ। लेकिन उनके पास बीज नहीं थे। रोहन ने कहा, 'उसकी चिंता मत करो! पहले हम मिट्टी तैयार करते हैं, जब पौधे बड़े हो जाएंगे तब हम बीज ले आएंगे!'
दोनों ने मिलकर बहुत मेहनत की और ज़मीन तैयार कर दी। लेकिन कई दिन बीत गए और वहाँ कुछ भी नहीं उगा। एक दिन एक व्यापारी वहाँ से गुज़रा। उसने पूछा, 'बगीचा तो तैयार लग रहा है, पर फूल कहाँ हैं?'
अर्जुन उदास होकर बोला, 'साहब, हमारे पास बीज ही नहीं हैं।' व्यापारी मुस्कुराया और बोला, 'बेटा, बिना बीज के बगीचा कैसे टिक सकता है? जिस काम को शुरू करने के लिए ज़रूरी साधन या पूँजी (Capital) न हो, उस काम का फल कभी स्थायी नहीं हो सकता।'
अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। उसने पहले बीज जमा किए और फिर बाग लगाया। अब उसका बगीचा फूलों से भरा रहता है और हमेशा हरा-भरा रहता है।