एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही दयालु और ईमानदार था। एक दिन, उसके स्कूल के दो दोस्त, लियो और सैम, उसके पास आए। वे दोनों हमेशा दूसरों का मज़ाक उड़ाने और शरारतें करने में माहिर थे। लियो ने मुस्कुराते हुए कहा, 'अरे अर्जुन, तुम हमेशा उन बड़े लोगों और होनहार बच्चों के साथ क्यों रहते हो? हमारे साथ आओ, हम मिलकर दूसरों को परेशान करेंगे!'
अर्जुन को यह सुनकर अच्छा नहीं लगा। उसने धीरे से कहा, 'नहीं दोस्तों, मुझे तुम्हारा यह तरीका पसंद नहीं है। मैं कुछ अच्छा सीखना चाहता हूँ।' लियो और सैम ने उसका मज़ाक उड़ाया और उसे 'उबाऊ' कहकर चले गए। कुछ दिनों बाद, अर्जुन ने गाँव की एक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जब सभी बड़े लोग और शिक्षक उसकी प्रशंसा कर रहे थे, तब लियो और सैम कोने में खड़े होकर उसकी सफलता पर ईर्ष्या कर रहे थे और बुराई कर रहे थे। तब अर्जुन को समझ आया कि महानता हमेशा नीच विचारों वाले लोगों से दूर रहती है, और केवल नीच विचार वाले लोग ही ऐसे लोगों के साथ रहने की कोशिश करते हैं।