एक सुंदर गाँव में करिकालन नाम का एक लड़का रहता था। उसे लकड़ी के खिलौने बनाने का बहुत शौक था। एक दिन, उसने गाँव के मेले के लिए खिलौने बनाने का फैसला किया। उसका दोस्त मारन बहुत उत्साहित था। उसने कहा, 'करिकालन, चलो अभी से लकड़ी काटना शुरू कर देते हैं, जल्दी काम खत्म हो जाएगा!'
लेकिन करिकालन रुक गया। उसने सोचा, 'कौन सी लकड़ी सबसे अच्छी होगी? कौन से रंगों का उपयोग करना चाहिए? खिलौनों को सुरक्षित कैसे रखा जाए?' जब उसने मारन से ये सवाल पूछे, तो मारन के पास कोई जवाब नहीं था। मारन उसका मज़ाक उड़ाने लगा, 'तुम इतने धीमे क्यों हो? क्या तुम डर रहे हो?' करिकालन को बुरा लगा, लेकिन उसने जल्दबाजी नहीं की।
वह अपने दादाजी के पास गया और सलाह मांगी। दादाजी ने कहा, 'बेटा, बिना पूरी जानकारी के काम शुरू करना मुश्किल पैदा कर सकता है। पहले अपने काम को अच्छी तरह समझ लो।' करिकालन ने पहले सही लकड़ी चुनी, रंग तैयार किए और एक योजना बनाई।
मेला शुरू हुआ। करिकालन के खिलौने बहुत सुंदर और मज़बूत थे। सभी लोगों ने उन्हें बहुत पसंद किया और खरीदा। दूसरी ओर, मारन ने बिना सोचे-समझे खिलौने बनाए थे, जो जल्दी ही टूट गए और कोई उन्हें नहीं खरीद सका। करिकालन की सावधानी ने उसे सफलता दिलाई।