एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे चीज़ें बनाना बहुत पसंद था। गाँव के मेले के लिए, उसने रेत का एक बहुत बड़ा मीनार बनाने का फैसला किया। उसके दोस्त, रोहन और मीरा, बहुत उत्साहित थे। उन्होंने कहा, 'अर्जुन, हम सब तुम्हारी मदद करेंगे, यह मीनार बहुत ऊँची बनेगी!'
लेकिन अर्जुन बहुत जल्दी में था। मीनार की नींव को मजबूत करने के लिए रेत को ठीक से दबाने के बजाय, उसने बस जल्दी-जल्दी रेत का ढेर लगा दिया। रोहन ने कहा, 'अर्जुन, नीचे का हिस्सा थोड़ा ढीला लग रहा है, क्या हम इसे ठीक करें?' लेकिन अर्जुन ने उसकी बात नहीं मानी। उसने कहा, 'समय नहीं है, हमें इसे जल्दी खत्म करना है!'
सबकी मदद से मीनार बहुत ऊँची और सुंदर बन गई। मेले के दिन, पूरा गाँव उस मीनार को देखने आया। अर्जुन को बहुत गर्व महसूस हो रहा था। तभी अचानक हवा का एक हल्का झोंका आया। क्योंकि नींव कमजोर थी, वह विशाल मीनार पल भर में ढहकर रेत का ढेर बन गई।
अर्जुन बहुत दुखी हुआ। उसके दोस्त वहीं खड़े थे, लेकिन क्योंकि काम करने का तरीका ही गलत था, वे मीनार को बचा नहीं सके। बहुत से लोगों ने मिलकर काम किया, फिर भी काम बिगड़ गया क्योंकि शुरुआत सही ढंग से नहीं हुई थी।