पहाड़ों के बीच बसे एक सुंदर गाँव में करी नाम का एक लड़का रहता था। करी बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह बिना सोचे-समझे काम करता था। एक दिन गाँव में बड़ा उत्सव होने वाला था। करी का दोस्त सोमू लकड़ी पर नक्काशी करने में बहुत माहिर था और वह उत्सव के लिए एक सुंदर कलाकृति बनाना चाहता था।
करी चाहता था कि काम जल्दी खत्म हो जाए ताकि वे उत्सव का आनंद ले सकें। उसने सोचा, 'अगर हम लकड़ी के खुरदरे हिस्सों पर बस थोड़ा रंग लगा दें, तो किसी को पता नहीं चलेगा।' सोमू से पूछे बिना, करी ने काम को जल्दी निपटाने के लिए शॉर्टकट अपनाया। उसने लकड़ी पर मोटा पेंट लगा दिया ताकि उसकी कमियां छिप जाएं। देखने में वह बहुत चमक रहा था और करी को अपनी इस तेजी पर गर्व महसूस हुआ।
उत्सव के दिन जब सोमू की कलाकृति दिखाई गई, तो गाँव के एक बुजुर्ग ने उसे ध्यान से देखा। उन्होंने महसूस किया कि पेंट के नीचे की लकड़ी ठीक से तराशी नहीं गई थी। उन्होंने कहा, 'यह देखने में तो सुंदर है, लेकिन इसमें एक कलाकार की ईमानदारी नहीं है। यह काम अधूरा और दिखावटी है।' सोमू को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। करी को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने सोचा कि उसकी जल्दबाजी ने सोमू की मेहनत और सम्मान, दोनों को नुकसान पहुँचाया है।
करी ने सोमू से माफी मांगी। उसने सीखा कि कोई भी काम करने से पहले यह सोचना बहुत जरूरी है कि क्या वह काम समाज की नजरों में सही है या नहीं।