एक छोटे से गाँव में आर्यन और समीर नाम के दो दोस्त रहते थे। आर्यन बहुत शांत स्वभाव का था, जबकि समीर को बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था। एक दोपहर, दोनों मिलकर लकड़ी का एक सुंदर खिलौना बना रहे थे। आर्यन बहुत सावधानी से काम कर रहा था, तभी अचानक समीर का हाथ आर्यन के हाथ से टकरा गया और खिलौना टूट गया।
समीर तुरंत गुस्से में चिल्लाने लगा, "तुमने यह जानबूझकर किया है! ध्यान से काम क्यों नहीं करते?" आर्यन को भी बहुत गुस्सा आया। उसका मन किया कि वह भी समीर को डांटे। लेकिन आर्यन ने एक गहरी साँस ली और अपनी आँखें बंद कर लीं। उसने सोचा, 'अगर मैं अभी गुस्सा करूँगा, तो हमारी दोस्ती में दरार आ जाएगी।'
आर्यन ने शांति से कहा, "कोई बात नहीं समीर, यह गलती से हुआ है। हम इसे फिर से बना लेंगे।" आर्यन की शांति देखकर समीर का गुस्सा शांत हो गया और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। आर्यन ने अपने गुस्से को काबू में रखा, इसलिए उनके बीच झगड़ा नहीं हुआ और उन्होंने मिलकर फिर से एक और भी सुंदर खिलौना बनाया।