एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता एक कुशल बढ़ई थे। एक दिन गाँव के चौक से गुजरते समय अर्जुन ने एक विशाल रथ देखा। उसके पहिए बहुत बड़े और मजबूत थे। अर्जुन ने सोचा, 'यह रथ कितना शक्तिशाली है! यह तो किसी भी बाधा को पार कर सकता है।'
अगले दिन अर्जुन अपने पिता के साथ नदी के किनारे गया। वहाँ उसने पानी में तैरती हुई एक बड़ी नाव देखी। अर्जुन ने उत्सुकता से पूछा, 'पिताजी, वह नाव तो इस रथ से भी कहीं ज्यादा मजबूत है। फिर हम उस नाव को रथ पर लादकर जंगल क्यों नहीं ले जाते?'
उसके पिता मुस्कुराए और बोले, 'बेटा, शक्ति का मतलब केवल बड़ा या मजबूत होना नहीं है। असली बात यह है कि कोई चीज़ किस काम के लिए बनी है। वह नाव पानी में तैरने के लिए बनी है। अगर हम उसे रथ पर रखकर ज़मीन पर खींचने की कोशिश करेंगे, तो वह टूट जाएगी। ठीक वैसे ही, यह रथ ज़मीन पर चलने के लिए बना है। अगर हम इसे नदी में उतार देंगे, तो यह डूब जाएगा। हर चीज़ का अपना एक सही स्थान होता है।'
अर्जुन समझ गया कि केवल शक्तिशाली होना काफी नहीं है, बल्कि अपनी शक्ति का सही जगह पर उपयोग करना ही बुद्धिमानी है।