एक सुंदर पहाड़ी गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ऊर्जावान था, लेकिन वह हर काम जल्दबाजी में करता था। गाँव के बुजुर्ग, श्री राघव, वार्षिक उत्सव के लिए एक बड़ा सामुदायिक भवन बनाने की योजना बना रहे थे। इसके लिए बहुत कौशल की आवश्यकता थी।
आर्यन ने अपने दोस्त रोहन का सुझाव दिया। रोहन देखने में बहुत फुर्तीला लग रहा था। लेकिन श्री राघव ने जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने रोहन के काम को ध्यान से देखा। उन्होंने महसूस किया कि रोहन तेज़ तो है, लेकिन उसके पास बड़े काम को पूरा करने के लिए सही औज़ार और सही योजना नहीं है।
फिर आर्यन ने विक्रम नाम के एक अन्य लड़के का सुझाव दिया। विक्रम बहुत शांत और धैर्यवान था। श्री राघव ने विक्रम को छोटी-छोटी लकड़ी की चीज़ें बनाते हुए देखा। उन्होंने देखा कि विक्रम के पास सही औज़ार हैं और उसे पता है कि काम को कैसे व्यवस्थित करना है। श्री राघव ने सोचा, 'विक्रम इस काम को, इन साधनों के साथ, अपनी इस कुशलता से बखूबी पूरा कर सकता है।'
उन्होंने पूरी जिम्मेदारी विक्रम को सौंप दी और उस पर पूरा भरोसा किया। विक्रम ने एक बहुत ही सुंदर भवन बनाया जिसे देखकर पूरा गाँव दंग रह गया। सही व्यक्ति को चुनने और उसकी क्षमता पर विश्वास करने के कारण उत्सव बहुत सफल रहा।