एक सुंदर गाँव में आर्यन और समीर नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। वे हमेशा साथ खेलते और साथ रहते थे। लेकिन एक दिन, एक खेल के दौरान दोनों के बीच छोटी सी बहस हो गई। गुस्से में समीर ने कहा, 'अब मैं तुम्हारा दोस्त नहीं हूँ!' और वहाँ से चला गया। आर्यन को बहुत दुख हुआ, लेकिन उसने समीर को ढूँढने की कोशिश नहीं की।
कुछ हफ्ते बीत गए। एक शाम, आर्यन अपने बगीचे में काम कर रहा था, तभी एक भारी लकड़ी का लट्ठा उसके रास्ते में आ गया। आर्यन उसे हटाने की कोशिश कर रहा था, पर वह बहुत भारी था। तभी समीर वहाँ आया। समीर को एहसास हुआ कि उनकी लड़ाई का कोई ठोस कारण नहीं था और आर्यन की कोई गलती नहीं थी। समीर ने आगे बढ़कर आर्यन की मदद की।
उस मदद के साथ ही उनके मन की कड़वाहट भी खत्म हो गई। समीर ने धीरे से कहा, 'मुझे माफ कर दो आर्यन, उस दिन मैं बिना वजह गुस्सा हो गया था।' आर्यन मुस्कुराया और उसने समीर को गले लगा लिया। उन्हें समझ आ गया कि झगड़े की कोई असली वजह थी ही नहीं, इसलिए वे फिर से पुराने दोस्त बन गए।