एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। वह राघव जी की मिट्टी के बर्तनों की एक छोटी सी दुकान में काम करता था। राघव जी बहुत दयालु थे, लेकिन अपने काम को लेकर बहुत सख्त थे। एक दिन उन्होंने आर्यन को कुछ विशेष मिट्टी के दीये दिए और कहा, 'आर्यन, इन दीयों को बहुत सावधानी से सजाकर रखना। एक छोटी सी चूक या भूल भी बहुत बड़ा नुकसान कर सकती है।'
आर्यन ने शुरू में तो बहुत ध्यान दिया, लेकिन शाम को जब उसके दोस्त खेलने के लिए बुलाने आए, तो उसका मन भटक गया। उसने सोचा, 'अभी रख देता हूँ,' और जल्दबाजी में एक दीया किनारे पर थोड़ा टेढ़ा रख दिया। अगली सुबह जब राघव जी ने दुकान खोली, तो वह दीया गिरकर टूट चुका था। वह एक विशेष ऑर्डर था।
राघव जी ने उसे डांटा नहीं, बल्कि उदास होकर कहा, 'आर्यन, एक पल की लापरवाही कितना बड़ा नुकसान कर सकती है, क्या तुम समझ रहे हो? हमें अपने काम में और दूसरों के साथ व्यवहार में हमेशा सचेत रहना चाहिए।'
आर्यन को अपनी गलती का गहरा अहसास हुआ। उसने खुद से वादा किया कि वह अब कभी भी काम में लापरवाही नहीं करेगा। उसने हर काम को पूरी एकाग्रता और सावधानी से करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, उसकी इसी जिम्मेदारी और सतर्कता ने उसे गाँव का सबसे भरोसेमंद लड़का बना दिया।