बहुत समय पहले, सोलापुर नाम का एक सुंदर राज्य था। वहाँ विक्रम नाम का एक राजा शासन करता था। विक्रम बहादुर तो था, लेकिन उसमें एक बुराई थी—वह अपनी शक्ति का उपयोग लोगों पर कठोर नियम थोपने के लिए करता था।
एक बार, रवि नाम के एक गरीब किसान के खेत सूखे के कारण बर्बाद हो गए। जब कर (tax) भरने का समय आया, तो रवि महल गया और बोला, 'महाराज, बारिश न होने के कारण मेरी फसल नष्ट हो गई है, मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं है।' लेकिन राजा विक्रम ने कठोरता से कहा, 'कानून सबके लिए बराबर है। यदि तुम कर नहीं दे सकते, तो तुम्हें अपनी जमीन देनी होगी।'
रवि और उसका परिवार बेघर हो गया। यह देखकर सोमू नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति ने राजा से कहा, 'महाराज, एक हत्यारा केवल एक जीवन लेता है, लेकिन आप अपने अधिकार से कई परिवारों की खुशियाँ और जीवन छीन रहे हैं। यह हत्या से भी बड़ा अपराध है।'
उस रात राजा विक्रम सो नहीं सका। उसे उन लोगों के आँसू और अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे समझ आया कि राजा का काम रक्षा करना है, शोषण करना नहीं। अगले दिन, विक्रम ने अपनी गलती सुधारी, रवि की जमीन वापस की और कर कम कर दिए। राज्य में फिर से खुशहाली लौट आई।