बहुत समय पहले, सुंदरपुर नाम का एक समृद्ध राज्य था। वहाँ विक्रम नाम का एक राजा राज करता था। विक्रम एक दयालु राजा था, लेकिन उसकी एक बड़ी कमी थी। वह रोज़ होने वाले छोटे-छोटे अन्याय और गलतियों पर ध्यान नहीं देता था। वह सोचता था, 'मेरे पास बहुत काम है, मैं रोज़ छोटी-छोटी बातों की जाँच कैसे कर सकता हूँ?'
एक दिन, रवि नाम के एक किसान ने सोम नाम के एक व्यापारी के खिलाफ शिकायत की। सोम ने रवि के अनाज के साथ धोखाधड़ी की थी। लेकिन राजा विक्रम ने उस शिकायत को अनसुना कर दिया। सोम ने देखा कि राजा छोटी गलतियों पर ध्यान नहीं देता, इसलिए उसने और भी लोगों को ठगना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे गाँव में झगड़े बढ़ने लगे और लोग एक-दूसरे पर भरोसा करना छोड़ दिए। राज्य की शांति और समृद्धि खत्म होने लगी।
तभी मीरा नाम की एक बुद्धिमान वृद्धा राजा के पास आई और बोली, 'महाराज, जिस तरह एक छोटा सा छेद बड़ी नाव को डुबो सकता है, उसी तरह यदि आप रोज़ होने वाले अन्याय को नहीं रोकेंगे, तो यह पूरा राज्य नष्ट हो जाएगा।'
विक्रम को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तय किया कि वह रोज़ लोगों की समस्याएँ सुनेगा और न्याय करेगा। जैसे ही न्याय मिलने लगा, लोगों का भरोसा वापस आ गया और सुंदरपुर फिर से खुशहाल हो गया।