धर्मपुरी नामक एक सुंदर गाँव में सोमू नाम का एक लड़का रहता था। एक दिन खेलते समय, सोमू ने देखा कि कथिर नाम का एक लड़का गाँव के सामुदायिक केंद्र के लिए रखी गई लकड़ी की एक सुंदर पटिया चोरी करके ले जा रहा है। कथिर उम्र में बड़ा और ताकतवर था, इसलिए कोई भी उसे रोकने की हिम्मत नहीं कर रहा था। सोमू तुरंत गाँव के मुखिया, माणिक के पास गया।
माणिक एक बहुत ही समझदार और न्यायप्रिय व्यक्ति थे। उन्होंने बिना गुस्सा किए पहले सोमू की बात सुनी और फिर कथिर को बुलाकर पूछताछ की। कथिर ने पहले तो बहाने बनाने की कोशिश की, लेकिन माणिक ने पूरी सच्चाई जान ली थी। माणिक जानते थे कि केवल डांटने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ऐसी सजा देनी होगी जिससे भविष्य में कोई ऐसा न करे।
उन्होंने कथिर से कहा, 'कथिर, तुमने जो किया वह गलत है। अपनी गलती सुधारने के लिए, तुम्हें अगले एक महीने तक गाँव के बढ़ई की मदद करनी होगी और सामुदायिक कार्यों में हाथ बंटाना होगा।' कथिर को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने माफी मांगी। इस सजा ने कथिर को सुधारा और गाँव के अन्य लोगों को भी ईमानदारी का पाठ पढ़ाया। उसके बाद गाँव में कभी ऐसी घटना नहीं हुई।