बहुत समय पहले, 'हरित द्वीप' नामक एक सुंदर राज्य में विक्रम नाम का एक राजकुमार रहता था। विक्रम बहुत दयालु था, लेकिन उसकी एक बड़ी कमी थी। उसे लगता था कि मुसीबतें कभी उसके पास नहीं आएंगी। वह हमेशा कहता, 'जब सब कुछ इतना अच्छा चल रहा है, तो चिंता क्यों करनी?'
इसी वजह से उसने अपने महल के चारों ओर मजबूत दीवारें नहीं बनवाईं और न ही अपने सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार किया। उसके बुद्धिमान सलाहकार सोमनाथ अक्सर कहते थे, 'राजकुमार, शांति के समय में ही सुरक्षा की तैयारी कर लेनी चाहिए।' लेकिन विक्रम उनकी बातों को हँसकर टाल देता था।
एक दिन, अचानक दुश्मन की सेना ने राज्य पर हमला कर दिया। विक्रम घबरा गया। उसके पास न तो मजबूत दरवाजे थे, न प्रशिक्षित सैनिक और न ही सुरक्षा के लिए ऊँची दीवारें। दुश्मन की आहट सुनते ही विक्रम डर के मारे कांपने लगा। तैयारी की कमी के कारण वह अपने लोगों की रक्षा करने में असमर्थ रहा।
इस घटना ने विक्रम को बहुत बड़ा सबक सिखाया। उसने महसूस किया कि सुरक्षा के लिए समय रहते कदम उठाना कितना जरूरी है। इसके बाद उसने राज्य में मजबूत किले बनवाए और अपनी सेना को प्रशिक्षित किया।