चंद्रपुर नाम का एक समृद्ध राज्य था, जहाँ राजा विक्रम राज करते थे। राजा दयालु थे, लेकिन वे अपने मंत्री सोमनाथ पर बहुत भरोसा करते थे। सोमनाथ के पास शक्ति तो थी, पर बुद्धि नहीं थी। वह हमेशा राजा को अपने स्वार्थ के लिए उकसाता था।
एक बार राज्य में भीषण अकाल पड़ा। फसलें सूख गईं और लोग भूखे मरने लगे। राजा विक्रम ने सोचा कि राजकोष का अनाज जनता में बाँट दिया जाए। लेकिन सोमनाथ ने कान में कहा, "महाराज, अगर आपने अनाज बाँट दिया, तो सेना के लिए क्या बचेगा? इसे बचाकर रखना ही समझदारी है।" राजा ने उसकी गलत सलाह मान ली।
धीरे-धीरे प्रजा का धैर्य टूट गया। जब राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ, तब तक जनता का विश्वास उठ चुका था और राज्य बिखर चुका था। राजा समझ गए कि एक मूर्ख मंत्री किसी भी राजा के लिए सबसे बड़ा बोझ और विनाश का कारण होता है।