पुराने समय की बात है, चंद्रपुरी नामक एक सुंदर राज्य में विक्रम नाम का एक राजकुमार रहता था। विक्रम बहुत दयालु था, लेकिन उसकी एक आदत थी—वह हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहता था। एक बार, राज्य की सीमा पर बसे एक छोटे से गाँव में पानी की भारी किल्लत हो गई। गाँव वाले बहुत परेशान थे। विक्रम ने तुरंत अपने मंत्रियों को बुलाया और पूछा, 'हमें क्या करना चाहिए?'
मुख्य मंत्री ने एक नया कुआँ खोदने का सुझाव दिया, लेकिन विक्रम को लगा कि कुछ कमी है। उसने केवल सुझाव सुनने के बजाय, खुद गाँव जाकर सच्चाई का पता लगाने का फैसला किया। जब वह गाँव पहुँचा और वहाँ की सूखी ज़मीन और खेतों को देखा, तो उसे समझ आया कि समस्या केवल पानी की कमी नहीं थी, बल्कि ज़मीन के नीचे की जलधारा का रास्ता रुक जाना और जल निकासी की खराब व्यवस्था थी। उसने एक जासूस की तरह गहराई से जाँच की।
जब वह महल वापस आया, तो उसने केवल सलाह नहीं माँगी, बल्कि अपनी खोज के आधार पर एक ठोस योजना बनाई। उस योजना से गाँव फिर से हरा-भरा हो गया। विक्रम समझ गया कि एक राजा का कर्तव्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि सच्चाई को तेज़ी से जानकर सही निर्णय लेना है।