राज्य की सीमा के पास एक छोटे से गाँव में कवि नाम का एक लड़का रहता था। कवि बहुत शांत था और उसकी नज़र बहुत तेज़ थी। एक दिन, राजा के दूत ने उसे एक गुप्त काम सौंपा। गाँव में कुछ संदिग्ध लोग आए थे और उन्हें बिना पकड़े गए देखना था।
कवि ने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली। उसने पुराने और मैले कपड़े पहने, चेहरे पर थोड़ी धूल लगाई और एक साधारण मजदूर की तरह दिखने लगा। वह उन संदिग्ध लोगों के पीछे नहीं भागा, बल्कि दूर बैठकर चुपचाप उन्हें देखता रहा कि वे क्या कर रहे हैं।
एक बार, उन संदिग्ध लोगों में से एक ने कवि को बहुत गौर से देखा। कवि डरा नहीं और न ही उसने घबराहट दिखाई। उसने बस एक साधारण लड़के की तरह सिर झुकाया और अपने काम में लग गया। उस व्यक्ति को लगा कि यह तो बस एक मामूली लड़का है। कवि ने जो कुछ भी देखा, वह किसी को नहीं बताया। उसने सारी जानकारी चुपचाप दूत तक पहुँचा दी। कवि की इसी समझदारी और धैर्य ने राज्य को बचा लिया।