राज्य की सीमा पर बसे एक छोटे से गाँव में इलंगोवन नाम का एक युवक रहता था। वह देखने में बहुत ही शांत स्वभाव का था, हमेशा एक संन्यासी की तरह साधारण वस्त्र पहनता और मौन रहता था। लोग उसे देखकर समझते थे कि वह दुनिया से विरक्त हो चुका है।
लेकिन इलंगोवन का एक गुप्त मिशन था। वह राजा का एक कुशल जासूस था। एक बार, गाँव में कुछ व्यापारियों का एक समूह आया। वे देखने में साधारण लग रहे थे, लेकिन इलंगोवन को उनकी बातों में कुछ संदेह लगा। वे गाँव की सुरक्षा और राजा के रास्तों के बारे में गुप्त जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे थे।
इलंगोवन ने अपना संन्यासी का रूप नहीं बदला। वह चुपचाप उनके पास बैठा रहा। चूंकि वह एक संन्यासी के वेश में था, इसलिए किसी को भी यह शक नहीं हुआ कि वह उनकी बातें सुन रहा है। उसने बहुत ही सावधानी से उनकी हर गतिविधि और बातचीत पर नज़र रखी। अंत में, उसने उनकी साजिश का पता लगा लिया और राजा को गुप्त सूचना भेज दी। कोई भी यह नहीं जान पाया कि वह जासूस था, वह बस एक साधारण संन्यासी बना रहा।