एक सुंदर गाँव में अर्जुन नाम का एक किसान रहता था। उसके पास एक बड़ा खेत था, जहाँ वह बहुत मेहनत से फसलें उगाता था। उसकी फसलें ही उसके परिवार का सहारा थीं। लेकिन एक रात, एक भयानक तूफान आया और देखते ही देखते अर्जुन का पूरा खेत बर्बाद हो गया। उसकी सारी मेहनत मिट्टी में मिल गई।
अर्जुन अपने खेत के पास बैठकर रोने लगा। उसका मित्र विजय उसके पास आया और बोला, 'अर्जुन, अपनी संपत्ति खोने के दुख में मत डूबो। तुम्हारी मेहनत करने की शक्ति और तुम्हारा हुनर अभी भी तुम्हारे पास है। यही तुम्हारी असली संपत्ति है, जिसे कोई तूफान नहीं छीन सकता।'
पहले तो अर्जुन को बहुत डर लगा, लेकिन फिर उसने विजय की बात पर गौर किया। उसने सोचा, 'धन तो चला गया, पर मेरी हिम्मत अभी भी मेरे साथ है।' अगले ही दिन, अर्जुन ने फिर से अपने औजार उठाए और खेत में काम करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, उसने फिर से एक हरा-भरा खेत तैयार कर लिया। उसकी इस अटूट ऊर्जा ने उसे पहले से भी अधिक सफल बना दिया।